Dainik Jagran 2013-05-09

पिंजड़े में बंद तोते की कहानी

कोलगेट घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार से साझा करने को लेकर विगत बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीई को कड़ी फटकार लगाते हुए उसे ‘पिंजड़े में बंद तोते’की संज्ञा दी है। अदालत ने कहा कि यह तोता अपने पालक की जुबां ही बोलता है। इसके साथ ही अदालत ने कानूनमंत्री द्वारा रिपोर्ट में संशोधन करने और कोयला मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिवों द्वारा रिपोर्ट का अवलोकन करने पर गंभीर आपत्ति जताई है। अदालत ने पूरे प्रकरण को ‘पिंजड़े में बंद एक तोते और कई मालिकों’की दुर्भाग्यपूर्ण कहानी बताया। अदालत ने सरकार को चेताते हुए साफ संकेत भी दे दिया है कि यदि सीबीआई को स्वतंत्र नहीं किया गया तो अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
New Indian Express 2013-05-04

Fight Islamic fundamentalism

While New Delhi is mired in the fallout of the coal scam and repeated incursions by China deep into the Indian territory, the threat posed by Islamic fundamentalists looms large on the rest of the country. Ironically, the threat is most pronounced in those parts of India which are under the sway of so-called “secular” parties; and BJP in such places is virtually non-existent. This dubious line-up is headed by the Kashmir Valley, followed by Kerala and West Bengal.
Dainik Jagran 2013-05-02

बेखबर-बेअसर भ्रष्टाचारी सरकार

कोयला घोटाले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी से पूरी सरकार कटघरे में खड़ी हो गई है। कोयला घोटाले की जांच कर रही सीबीआई को सर्वोच्च न्यायालय ने जांच की प्रगति सरकार से साझा नहीं करने की हिदायत दी थी। किंतु सीबीआई जिस जांच रिपोर्ट को अदालत में पेश करने वाली थी, उसे कानून मंत्री और अन्य सिपहसालारों द्वारा काटछांट कर सरकार के अनुकूल बनाया गया। इस पर विगत मंगलवार को अदालत ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है, ‘‘यह इतना बड़ा विश्वासघात है कि उसने पूरी नींव को हिला कर रख दिया है...यह सामान्य नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया धोखा है। पहले ही तय कर लिया गया था कि अदालत को इसकी जानकारी नहीं दी जाएगी।’’ सरकार के इस छलफरेब के कारण पूरी दुनिया हम पर हंस रही है। स्वाभाविक है कि सत्ता के षीर्ष स्तर तक फैले भ्रष्टाचार से सर्वाधिक क्षति भारत की साख और उसकी छवि को हुई है। किंतु बड़े-बड़े घोटालों के सामने आने के बाजूद कथित ईमानदार छवि वाले देष के प्रधानमंत्री शर्मसार नहीं हैं। क्यों?
Dainik Jagran 2013-04-25

क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?

पिछले साल 400 से अधिक और इस वर्ष अब तक करीब सौ बार चीन की सेना ने भारतीय सीमा का अतिक्रमण किया है। अतिक्रमण की 90 प्रतिशत घटनाएं लद्दाख क्षेत्र में दर्ज की गई हैं। ताजा अतिक्रमण में विगत 15 अप्रैल की मध्यरात्रि को चीन की सेना पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्दी में भारतीय सीमा क्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर, बुरथे तक घुस आई। करीब 17,000 फीट की ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में चीनी सेना ने तीन अस्थायी चौकी निर्मित किए हैं। भारत द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद चीनी सैनिक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उसने उक्त क्षेत्र को अपना बताया है। चीन के इस दुस्साहस का कारण क्या है? यक्ष प्रश्न यह भी कि सत्ता अधिष्ठान चीन को माकूल जवाब देने से कतराता क्यों है?
New Indian Express 2013-04-20

Boston attacks and Islamic jehad

Terror strikes in Bangalore on Wednesday last and a more lethal one in Boston a day earlier, have ironically come when our “secularists” are pleading for mercy for other terrorists in India whose mercy petition has been rejected or who has been convicted for terror-related activities. At the time of writing, the investigators, both in Boston and Bangalore have not zeroed in on the perpetrators of the bomb blasts. What ,however, would have encouraged a “shell-shocked” American nation is its President’s declaration that the “full weight” of the US justice system will bear down on them. Back home, we would hear pontification about the “resilience of our people” to carry on with their lives in a normal manner in spite of repeated terror attacks.
Dainik Jagran 2013-04-18

बेकाबू इस्लामी आतंकवाद

अमेरिका के सर्वाधिक सुरक्षित शहर बोस्टन में तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस्लामी आतंक ने एक बार फिर तांडव मचा ही दिया। इस हमले के दूसरे दिन हमारे देश में बंगलौर के मलेश्वरम में भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय के निकट हुए आतंकी हमले में 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बोस्टन मैराथन में भाग लेने आए 90 देषों के 28 हजार धावकों के लिए स्वाभाविक तौर पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए होंगे, किंतु आतंकी अपने मंसूबे में कामयाब रहे। दोहरे बम विस्फोट में तीन निरपराध मारे गए, जबकि दो सौ लोग गंभीर रूप से घायल हैं। भारत पर आतंकी हमलों की लंबी सूची है। भारत सहित कई ऐसे देश जो इस्लाम के अनुयायी नहीं हैं, वे सर्वभौम इस्लामी एजेंडे के कारण जिहादियों के निषाने पर हैं। शरीआ का पूर्ण पालन नहीं करने वाले इस्लामी देश भी जिहादियों के कहर से अछूते नहीं हैं। किंतु इस्लामी आतंकवाद को लेकर सेकुलर दलों की जो सोच है, उसके कारण इस्लामी आतंकवाद पर काबू पाना असंभव हो रहा है।
New Indian Express 2013-04-06

Katju is selective on pardon plea

The obvious obsession of several “secularists” led by jurist Markandey Katju, Chairman of the Press Council of India and a former judge of the Supreme Court, to get film star Sanjay Dutt a pardon from the President/Governor has raised several questions. In his petition to the President and numerous articles in dailies, Katju wants the government to look at the “facts of the case and then consider whether he should be granted pardon.” From this premise comes the next proposition: “if he (Dutt) deserves pardon, he should not be denied it just because he is celebrity.” What are the “facts” as the retired judge sees them? “He has already undergone 18 months of imprisonment”. “It took him five to six years to restore his damaged career.” “He has often been ostracised by the people as he had the brand of a terrorist on himself.” “Dutt did not get film offers, could not get bank loans, and (suffered) various other tribulations and indignities during the 20-year period.”
Dainik Jagran 2013-03-28

सेकुलर आतंकवाद

आतंकवाद के खात्मे के लिए सत्ता अधिष्ठान के कथित ‘दृढ़ निश्चय व ठोस इरादों’ की कलई फिल्म अदाकार संजय दत्त और आतंकी लियाकत शाह को लेकर चल रही मुहिम को मिल रहे सरकारी समर्थन से खुल जाती है। भारत-नेपाल सीमा पर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पकड़े गए हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी लियाकत शाह से हुई पूछताछ के बाद दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में स्थित एक गेस्ट हाउस से भारी मात्रा में गोलीबारुद और असलहे बरामद किए गए। आतंकियों की साजिश होली के अवसर पर दिल्ली को दहलाने की थी। मुंबई हमलों की तर्ज पर दक्षिणी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाके में अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड से हमले की साजिश रची गई थी।
New Indian Express 2013-03-23

Congress’ Italian muddle

The current controversy over the Italian Marines who have effectively escaped from the Indian government’s custody is not the only one where the Congress-led government has invariably come a cropper in bringing to book foreign offenders on Indian soil though latest media reports say that Italian government has changed its stand and will allow the Marines to return to India. The same media reports also quote Italian officials have received “ample assurances” from Indian authorities “on the treatment that the marines will receive and the defence of their fundamental rights.” This gives rise to doubts as to whether the change in the stance of the Italian government is a victory for India’s diplomacy, as the UPA leaders claim, or the result of a behind-the-scenes deal.
New Indian Express 2013-03-09

An ill-advised Bangla visit

The UPA government should take full responsibility for the wrong timing of President Mukherjee’s visit to Bangladesh. Like many other instances of incompetence of this government, the Presidential visit might also go on record as ill-timed, ill-prepared and causing grave embarrassment both for India and Bangladesh. For the last one month the protests in Dhaka were going on in what is known as the Shahbag event. In the first few weeks it was a massive demonstration of the Bangladesh people’s anger at the collaborators and conspirators of the 1971 ravaging of the country when it was seeking to assert its own cultural nationalism from subjugation to Pakistan’s irredentism, going scot free for forty years after the liberation. While the liberation of 1971 brought a secular and liberal constitution, within five years the Islamists provoked a coup that decimated the liberation’s father figure and most of his family members in a display of barbarism typical of extremist Islamist violence. Only Sheikh Mujibur Rahman’s daughter Hasina who happened to be then in India hence escaped.