Punjab Kesari 2021-01-06

हम में से कुछ को अपनी पहचान से घृणा क्यों?

गत बुधवार (30 दिसंबर) को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बहुसंख्यक मुसलमानों की भीड़ ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त करके जला दिया। इस प्रकार के जमींदोज का यह भारतीय उपमहाद्वीप में कोई पहला मामला नहीं था और यह आखिरी बार था- ऐसा भी कहा नहीं जा सकता। विश्व के इस भूखंड में देवालय विध्वंस की परंपरा सन् 712 में मो.बिन कासिम के सिंध पर आक्रमण के साथ शुरू हुई थी- जो गजनी, गौरी, खिलजी, बाबर, औरंगजेब और टीपू सुल्तान जैसे क्रूर इस्लामी आक्रांताओं के कालखंड से आजतक अविरत जारी है। जब पाकिस्तान के खैबर में जिहादियों द्वारा प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़ा जा रहा था, तब लगभग उसी समय में भारत के आंध्रप्रदेश में कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां को खंडित कर दिया गया। पहले विजयनगर में भगवान राम की 400 वर्ष पुरानी मूर्ति क्षत-विक्षत किया गया, फिर राजमुंद्री में भगवान सुब्रमण्येश्वर स्वामी और विजयवाड़ा में देवी सीता की प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त मिली। अब खैबर पख्तूनख्वा और आंध्रप्रदेश की घटनाओं में अंतर केवल इतना था कि पाकिस्तान में यह सब घोषणा करके खुलेआम हुआ, तो यहां चोरी-छिपे या रात के अंधेरे में किया गया। यह अकाट्य है कि इन दोनों घटनाओं को मूर्त रूप में देने वाली मानसिकता एक ही है। यदि 1947 के बाद पाकिस्तान का हिंदू, बौद्ध, जैन मंदिरों और प्रतिमाओं के विध्वंस का रिकॉर्ड है, तो खंडित भारत में "काफिर-कुफ्र" दर्शन से प्रेरित मजहबी हिंसा का लंबा इतिहास है। वर्ष 1989-91 के बीच जब कश्मीर जिहादी तूफान की चपेट में था, जिसमें दर्जनों हिंदुओं की हत्या और उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार के बाद पांच लाख कश्मीर पंडित पलायन हेतु विवश हुए थे- तब उसी विषाक्त वातावरण में कई ऐतिहासिक मंदिरों को या तो बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया था या फिर पूर्ण रूप से खंडित। 2012 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर के 208 मंदिर जिहाद का शिकार हुए थे।
Punjab Kesari 2020-12-30

वर्ष 2020 के संदेश और सबक

वर्ष 2020 अपने अंतिम पड़ाव पर है। पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। यह साल कई घटनाओं का साक्षी रहा और भारत सहित शेष विश्व के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश व सबक छोड़ गया। जहां कोविड-19 संक्रमण ने प्रकृति के सामने मनुष्य की औकात बता दी, तो वही उदारवादी लोकतांत्रिक देश, फ्रांस- ने इस्लाम के कट्टर स्वरूप से निपटने हेतु एक "प्रायोगिक योजना" दुनिया के सामने रखने का साहस किया है। बात यदि भारत की करें, तो यहां 2019 में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मिले व्यापक जनादेश को निरस्त करने का प्रयास हो रहा है। इसका प्रमाण वर्ष 2020 के प्रारंभ में नागरिक संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) विरोधी शाहीन बाग प्रदर्शन और हिंसा में दिखा, तो अब इसका दूसरा संस्करण हम किसान आंदोलन के रूप में देख रहे है। पड़ोसी देशों की बात करें, तो नेपाल आतंरिक संकट से जूझ रहा है। वहां साम्यवादी चीन का हस्तक्षेप कितना है- वह तब स्पष्ट रूप से सामने आ गया, जब नेपाली राजनीतिक समस्या का हल निकालने चीनी दूत एकाएक काठमांडू पहुंच गए। चीन का ही अन्य "सैटेलाइट स्टेट" पाकिस्तान हर वर्ष की तरह इस साल भी अपने वैचारिक चरित्र के अनुरूप भारत-हिंदू विरोधी षड़यंत्र में व्यस्त रहा। इसी साल चीन को यह भी सबक मिल गया कि एशिया में उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी भारत 1962 की दब्बू पृष्ठभूमि से बाहर आ चुका है। वही अमेरिका, ट्रंप शासन से मुक्त होकर बिडेन के नेतृत्व में क्या रूख अपनाएगा, यह देखना शेष है।
Punjab Kesari 2020-12-23

क्रिसमस पर आत्मचिंतन

कोविड-19 के वैश्विक प्रकोप के साए में विश्व (भारत सहित) आज- 25 दिसंबर को क्रिसमस मना रहा है। इस त्योहार के साथ नववर्ष की उल्टी गिनती भी शुरू हो जाती है। सभी पाठकों को इसकी ढेरों शुभकामनाएं। आप सभी कोरोना-मुक्त नए साल में सकुशल, सहर्ष और स्वस्थ प्रवेश करें- ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है। यूं तो क्रिसमस का संबंध ईसा मसीह की जयंती से है, किंतु इसे अब दुनिया में मनाया जाता है। भारत में ईसाइयों की संख्या देश की कुल आबादी का केवल 2.3 प्रतिशत हैं, तब भी क्रिसमस पर सार्वजनिक अवकाश होता है। किंतु 25 दिसबंर को ही ईसा मसीह का जन्म हुआ था, इसका कोई प्रमाणिक रूप से ऐतिहासिक या वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह तिथि कल्पना पर आधारित है। पवित्रग्रंथ बाइबल में वर्णित गोस्पल कथाओं के अनुसार- बैथलहम में "दिव्य-हस्तक्षेप" के बाद कुंवारी मैरी ने यीशु को जन्म दिया था, वह भी बिना किसी पुरुष संपर्क के। इन कथाओं में भी 25 दिसंबर का उल्लेख नहीं है।
Punjab Kesari 2020-12-16

"गोदी मीडिया"- कटु सत्य

भारत के सार्वजनिक विमर्श में इन दिनों "गोदी मीडिया" जुमला बहुत प्रचलित है और दुर्भाग्य से इसका अस्तित्व एक कड़वा सच भी है। चाहे "गोदी मीडिया" संज्ञा का चलन अभी शुरू हुआ हो, किंतु यह पिछले 73 वर्षों से घुन की तरह भारतीय लोकतंत्र को खा रहा है। "गोदी मीडिया" के जन्म और इसके बढ़ते प्रभाव का एक लंबा इतिहास है। पं.नेहरू का सेकुलरवाद, वामपंथी विचारधारा का अधिनायकवाद और जिहादी मानसिकता- यह तीनों अलग-अलग होते हुए भी एक बड़ी सीमा तक एक-दूसरे का पर्याय है। जब वामपंथ के सहयोग से जिहादी पाकिस्तान का जन्म हुआ, तब पं.नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने पार्टी में उन नेताओं (मुस्लिम सहित) को शामिल करके "सेकुलर" घोषित कर दिया, जो स्वतंत्रता से पहले पाकिस्तान के लिए आंदोलित थे। विडंबना देखिए कि जो कलतक इस्लामी पाकिस्तान के पैरोकार थे, वे "सेकुलर" हो गए और अखंड भारत के पक्षधर "सांप्रदायिक"। खेद है कि यह परंपरा आज भी जारी है। उसी विरोधाभास के गर्भ से एक विशेष मीडिया संस्कृति ने जन्म लिया, जिसका विचार-वित्तपोषण तथाकथित "सेकुलर" सत्ता प्रतिष्ठान की "गोदी" में हुआ। कालांतर में इसी "गोदी मीडिया" ने सच्चे राष्ट्रवादियों, प्रतिकूल विचारधारा रखने वालों और सनातन भारत पर गौरवान्वित लोगों को लांछित करने हेतु सफेद झूठ, विकृत तथ्यों और अभद्र भाषा का उपयोग धड़ल्ले से किया। वास्तव में, "गोदी मीडिया" को इसका प्रशिक्षण उन देशों में मिला था, जहां वे सरकारी खर्चें पर "स्वतंत्र पत्रकारिता" का पाठ सीखने सोवियत संघ और पूर्वी यूरोपीय देशों का दौरा करते थे।
Punjab Kesari 2020-12-09

क्या दक्षिण की राजनीति बदलेगी?

क्या अब दक्षिण भारत की राजनीति में परिवर्तन आएगा? अभी तक कर्नाटक को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की आंधप्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु में उपस्थिति अभी बहुत सीमित है। यहां तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता भी इस चार प्रदेशों की भाजपा ईकाई में जान नहीं फूंक पाई है। किंतु क्या अब इसमें परिवर्तन होगा? हाल ही में ग्रेटर हैदराबाद नगर निकाय चुनाव के नतीजे आए, जिसमें भाजपा 4 से सीधा 48 सीटों पर पहुंच गई। वर्ष 2016 के चुनाव में जहां उसे 10.34 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे, वह इस वर्ष बढ़कर 35.5 प्रतिशत पर पहुंच गया। इससे पहले तेलगांना विधानसभा की एक सीट पर हुए उप-चुनाव में भी भाजपा 38.5 प्रतिशत मतों के साथ विजयी हुई थी। ऐसा क्या हुआ है कि दक्षिण भारत में भाजपा एक विकल्प बन रही है? इस प्रश्न का उत्तर- कांग्रेस के वैचारिक स्खलन और उसके संकुचित होते राजनीतिक आधार में छिपा है। स्वतंत्रता के समय तक कांग्रेस का वैचारिक अधिष्ठान सरदार पटेल के राष्ट्रवाद और गांधीजी के सनातन विचारों से ओतप्रोत था। किंतु इन दोनों जननेताओं के निधन पश्चात कांग्रेस पर "समाजवादी" पं.नेहरू का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप, कालांतर में पं.नेहरू की सुपुत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा 1969-70 में वामपंथी चिंतन को आत्मसात करने के बाद कांग्रेस का शेष राष्ट्रवादी और सनातनी दृष्टिकोण विकृत हो गया।
Punjab Kesari 2020-11-25

गुरु नानक देवजी की शिक्षाओं को समझने का समय

"सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया, कलतारण गुरु नानक आया.." आगामी 30 नवंबर को विश्वभर में सिख पंथ के संस्थापक श्री गुरु नानक देवजी (1469-1539) की 552वीं जयंती मनाई जाएगी। जब हम इस पवित्र दिन के बारे में सोचते है, तो एक राष्ट्र के रूप में हमने क्या भूल की है- उसका भी एकाएक स्मरण होता है। 1930-40 में जब इस्लाम के नाम भारत के विभाजन हेतु मुस्लिम लीग, ब्रिटिश और वामपंथी मिलकर विषाक्त कार्ययोजना तैयार कर रहे थे, तब हमने जो सबसे बड़ी गलतियां की थी- उनमें से एक यह भी है कि खंडित भारत ने गुरु नानकजी की जन्मस्थली ननकाना साहिब पर अपना दावा छोड़ दिया। पाकिस्तान एक घोषित इस्लामी राष्ट्र है। पिछले 73 वर्षों से पवित्र ननकाना साहिब उसी पाकिस्तान में स्थित है- जहां के सत्ता-अधिष्ठान ने मिसाइलों और युद्धपोत के नाम उन्हीं क्रूर इस्लामी आक्रांताओं- गजनवी, बाबर, गौरी, अब्दाली और टीपू-सुल्तान आदि पर रखे है- जिसके विषैले चिंतन से संघर्ष करते हुए सिख गुरुओं सहित अनेक शूरवीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इतने वर्षों बाद भी यदि आज हमारी मौलिक पहचान (हिंदू और सिख) सुरक्षित है, तो बहुत हद तक इसका श्रेय उन अमर बलिदानियों को जाता है, जिन्होंने कौम और हिंदुस्तान की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इन हुतात्माओं की श्रृंखला में गुरु अर्जनदेवजी, गुरु तेग बहादुरजी, गुरु गोबिंद सिंहजी, बंदा सिंह बहादुर बैरागी, अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह इत्यादि का बलिदान- एक कृतज्ञ राष्ट्र को सदैव स्मरण रहेगा।
Punjab Kesari 2020-11-18

देश में नागरिकों की "गैर-जिम्मेदारी" का कारण

दमघोंटू वायु-प्रदूषण के कारण राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने एक आदेश जारी करते हुए देशभर में 30 नवंबर तक पटाखे जलाने और उसके विक्रय पर रोक लगाई थी। किंतु दीपावली (14 नवंबर) पर लोगों ने एनजीटी द्वारा जारी प्रतिबंधों की धज्जियां उड़ा दी और जमकर आतिशबाजियां की। स्वाभाविक है कि इससे बहुत से सुधी नागरिकों में क्षोभ और आक्रोश उत्पन्न हुआ। अधिकांश को लगा कि हम भारतीय अपने नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं है। उनकी चिंता इसलिए भी तर्कसंगत है, क्योंकि जहरीली हवा न केवल कई रोगों को जन्म देती है, अपितु यह पहले से श्वास संबंधी रोगियों के लिए परेशानी का पर्याय बन जाती है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कालखंड में तो यह स्थिति "कोढ़ में खुजली" जैसी है। यह सही है कि कुछ देशों में नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति भारतीयों की तुलना में अधिक जागरुक है। किंतु क्या दीपावली के समय एनजीटी के आदेशों की अवहेलना का एकमात्र कारण भारतीयों में समाज, पर्यावरण और देश के प्रति संवेदनशीलता का गहरा आभाव होना है? क्या यह सच नहीं कि किसी समाज को प्रभावित करने में किसी भी संस्थान या व्यक्ति-विशेष की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है? जैसा एनजीटी का रिकॉर्ड रहा है- क्या उस पृष्ठभूमि में इस संस्था पर लोगों का विश्वास है?
Punjab Kesari 2020-11-11

बिहार वि.स. चुनाव 2020- भाजपा का स्ट्राइक रेट क्या कहता है?

बिहार में अधिकांश एग्जिट/ओपीनियन पोल के अनुमानों को धता बताकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बिहार में बहुमत प्राप्त कर लिया। परिणाम से अधिक उसमें निहित तीन संदेश काफी महत्वपूर्ण है। पहला- राजग के मुख्य दल भारतीय जनता पार्टी का स्ट्राइक रेट- अर्थात् 110 सीटों पर उसने चुनाव लड़ा और 74 सीटों पर उसकी विजय हुई- वह 67.2 प्रतिशत से अधिक है। स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सशक्त, राजनीतिक इच्छाशक्ति से परिपूर्ण छवि और लोकप्रियता के साथ भाजपा की राष्ट्रीय नीतियों पर बिहार के मतदाताओं ने मुहर लगा दी। बिहार के अतिरिक्त 11 राज्यों की 59 विधानसभा सीटों पर हुए उप-चुनाव में भाजपा 41 सीटों पर विजयी हुई है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनी रहेगी, क्योंकि यहां हुए उप-चुनाव में भाजपा 28 में से 19 सीटें जीतने में सफल हुई है। मणिपुर की 5 से 4 सीटों पर भाजपा ने विजय प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उत्तरप्रदेश, जहां गत दिनों हाथरस कथित बलात्कार मामले को लेकर स्वघोषित सेकुलरवादियों और स्वयंभू उदारवादियों ने हिंदू समाज को जाति के नाम पर बांटने का प्रयास किया था- वहां 7 सीटों पर हुए उप-चुनाव में से 6 पर भाजपा ने अपना परचम लहराया है। तेलंगाना में एक सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा 38.5 प्रतिशत मतों के साथ विजयी हुई है। कर्नाटक उपचुनाव में भाजपा ने 52 प्रतिशत वोट, गुजरात में 55 प्रतिशत वोट के साथ ओडिशा, नागालैंड, झारखंड और हरियाणा के उप-चुनाव में भी दमदार प्रदर्शन किया है। इन राज्यों के जनादेश ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब ढोंगी सेकुलरवाद के नाम पर टुकड़े-टुकड़े गैंग, देशविरोधियों और अलगाववादी शक्तियों को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगी और उसे अपने मताधिकार से चुनौती देती रहेगी।
Punjab Kesari 2020-11-04

बदलेंगे जम्मू-कश्मीर के हालात

पेरिस और कश्मीर- बीते दिनों आतंकी घटनाओं के साक्षी बने। जहां विगत दो सप्ताह के भीतर पेरिस में इस्लाम के नाम पर जिहादियों ने चार निरपराधों की हत्या कर दी, तो वही कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के तीन नेताओं को आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया। पेरिस में मरने वाले गैर-मुस्लिम, तो मारने वाले स्वघोषित सच्चे मुसलमान थे। वही घाटी में मरने और मारने वाले दोनों मुसलमान थे। यक्ष प्रश्न उठता है कि मुस्लिमों ने तीन मुस्लिम नेताओं की हत्या क्यों की? यह तीनों घाटी में भाजपा के माध्यम से बहुलतावादी सनातन भारत और उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े थे। संभवत: हत्यारों को इस जुड़ाव में इस्लाम के लिए खतरा नजर आया। कश्मीर में यह हत्याएं तब हुई, जब कालांतर में वर्तमान मोदी सरकार ने इस्लामी आतंकवाद-कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई में फ्रांस का खुलकर समर्थन करने की घोषणा की थी। बात केवल कश्मीर तक सीमित नहीं। जैसे ही भारत ने पेरिस में आतंकी घटनाओं के पश्चात फ्रांसीसी सरकार की कार्रवाई को न्यायोचित ठहराया, वैसे ही फ्रांस विरोधी वैश्विक मजहबी प्रदर्शन में भारतीय मुसलमान का बड़ा वर्ग भी शामिल हो गया। भोपाल में प्रशासनिक अनुमति के बिना कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के नेतृत्व में हजारों मुस्लिमों ने इक़बाल मैदान में प्रदर्शन किया, तो मुंबई स्थित नागपाड़ा और भिंडी बाजार क्षेत्र के व्यस्त सड़क-मार्ग पर विरोधस्वरूप फ्रांसीसी राष्ट्रपति का पोस्टर चिपका दिया। तेलंगाना में भी कांग्रेस प्रदेश अल्पसंख्यक ईकाई ने फ्रांस विरोधी प्रदर्शन किया और राज्य सरकार से फ्रांसीसी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी।

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