Dainik Jagran 2014-07-09

विश्व शांति को नई चुनौती

गृहयुद्ध से जूझ रहे इराक के घटनाक्रम न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के सामने नई चुनौती है। इराक और सीरिया में सक्रिय सुन्नी आतंकवादी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवेंट’ (आईएसआईएल) ने इराक और सीरिया में अपने कब्जे वाले क्षेत्र को खिलाफत अर्थात इस्लामिक स्टेट घोषित कर अपने मुखिया अबू बकर अल बगदादी को खलीफा बताते हुए उसे दुनिया के मुसलमानों का नेता भी घोषित किया है। उथलपुथल से जूझ रहे इराक पर कुर्द, शिया और सुन्नी बहुल इलाकों के रूप में तीन टुकड़ों में बंटने का खतरा मंडरा रहा है। आईएसआईएल द्वारा इस्लामिक स्टेट की घोषणा के बाद उत्तरी इराक में पूर्ण स्वतंत्र कुर्दिष स्टेट बनाने को लेकर घमासान मचा है। आईएसआईएल की बढ़ती शक्ति और उसका एजेंडा विश्व शांति के लिए अलग खतरा है।
Indian Express 2014-07-04

Caught in its own excesses

So disjointed is the Congress party because of its electoral rout that it is now beginning to think with a divided brain and speak in a forked tongue. What other explanation could there be when a senior leader of the party, A.K. Antony, expresses serious doubts about the efficacy of the Muslim appeasement policy and the next moment, its chief minister in Maharashtra announces the same quota sop for Muslims (and Marathas)? Antony said: “[The] Congress policy is equal justice to everyone. But people doubt whether that policy is being implemented or not. This doubt is created by the party’s proximity towards minorities and such a situation would open the door for the entry of communal forces into Kerala.”